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भगवान श्री गणेश की सरल पूजा विधि

सनातन धर्म अनुसार किसी भी कार्य को करने से पहले भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है । भगवान श्री गणेश की पूजा आह्वान के बिना किसी भी मांगलिक कार्य का शुभारम्भ नहीं होता हैं । इसलिए भगवान गणेश को प्रथम पूज्य भी कहा जाता हैं । भगवान श्री गणेश को बुद्धि के साथ रिद्धि सिद्धि के दाता भी कहे जाते हैं। उनका पूजन वंदन करने वाला कभी भी दुखी नहीं हेाता है। वे धन वैभव से अपने भक्तों को परिपूर्ण कर देते हैं। आइए जानते हैं उनकी पूजा विधि –

भगवान श्री गणेश की सरल पूजा विधि

शास्त्रों में भगवान गणेश के पूजन विधि को 16 भागों में कहा गया है। जिसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, द्रव्य दक्षिणा, आरती, परिक्रमा (प्रदक्षिणा) को 16 उपचार माना गया है। 16 उपचार का अर्थ है- पूजा के 16 तरीके। इन 16 तरीकों से पूजन शुरू करने से पहले सकंल्प लें।

संकल्प

संकल्प करने से पहले हाथों मे जल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें।

संकल्प का उदाहरण

जैसे 27/5/2019 को गणेश पूजन किया जाना है। तो इस प्रकार संकल्प लें।

मैं ( अपना नाम बोलें ) विक्रम संवत् 2077 को, ज्येष्ठ मास के पंचमी तिथि को बुधवार के दिन, पुनर्वसु नक्षत्र में, भारत देश के राजस्थान राज्य के जयपुर शहर में गलता तीर्थ में श्री गणेश का पूजन कर रही / रहा हूं। श्री गणेश मेरी मनोकामना (मनोकामना बोलें) पूरी करें।

आवाहन (गणेश जी को आने का न्यौता देना)

ऊँ गं गणपतये नमः आव्हानयामि स्थापयामि कहते हुए मूर्ति पर चावल चढ़ाएं। आवाहन का अर्थ है कि देव गणेश को अपने घर में आने का बुलावा देना।

 

आसन (गणेश जी को बैठने के लिए स्थान देना)

ऊँ गं गणपतये नमः आसनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि कहते हुए आसन दें। आसन का अर्थ है कि बुलाए गए देव गणेश को घर के पूजा घर में विराजने के लिए आसन दिया है।

 

पाद्यं ( भगवान गणेश के पैर धुलाना)

ऊँ गं गणपतये नमः पादयोः पाद्यं समर्पयामि कहते हुए पैर धुलाएं।

 

अर्घ (हाथ धुलाना)

आचमनी में जल, पुष्प, चावल लें। ऊँ गं गणपतये नमः हस्तयो: अघ्र्यं समर्पयामि कहते हुए हाथों को धुलाएं।

 

आचमन (मुख शुद्धि करना)

ऊँ गं गणपतये नमः आचमनीयम् जलं समर्पयामि कहते हुए आचमन के लिए जल छोड़ें । आचमन का अर्थ होता है मुख शुद्धि करना।

 

पंचामृत से स्नान कराना

ऊँ गं गणपतये नमः पंचामृतस्नानं समर्पयामि कहते हुए पंचामृत से नहलाएं। पंचामृत का अर्थ है कि दूध, दही, शक्कर, शहद व घी का मिश्रण। इन पांचों चीजों से भगवान को नहलाना।

 

शुद्ध जल से स्नान कराना

ऊँ गं गणपतये नमः शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि। कहते हुए शुद्ध जल से स्नान कराएं।

 

वस्त्र अर्पित करना

ऊँ गं गणपतये नमः वस्त्रोपवस्त्रम् समर्पयामि कहते हुए वस्त्र अर्पित करें।

 

गन्ध अर्पित करना

ऊँ गं गणपतये नमः गन्धं समर्पयामि। चंदन, रोली, हल्दी, मेहंदी, अष्टगंध इत्यादि सुगंधित द्रव्यों को लगाएं।

 

पुष्प अर्पित करना

ऊँ गं गणपतये नमः पुष्पं समर्पयामि कहते हुए पुष्प चढ़ाएं।

 

अक्षत (चावल) अर्पित करना

ऊँ गं गणपतये नमः अक्षताम् समर्पयामि। कहते हुए चावल अर्पित करें।

 

धूप दिखाना

ऊँ गं गणपतये नमः धूपम् आघर्पयामि कहते हुए धूप दिखाएं। अपने हाथों से धूप पर से हाथ फिरा कर गणेश जी पर छाया करें।

 

दीप दिखाना

ऊँ गं गणपतये नम दीपम् दर्शयामि। कहते हुए दीपक दिखाएं। अपने हाथों से दीपक पर से हाथ फिरा कर भगवान गणेश पर छाया करें।

 

आरती करें

ऊँ गं गणपतये नमः आरार्तिक्यम् समर्पयामि कहते हुए आरती अर्पित करें।

 

प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करें

हाथ में पुष्प लेकर भगवान गणेश की परिक्रमा करें। परिक्रमा करने के बाद भगवान गणेश की मूर्ति के सामने यह कहते हुए प्रदक्षिणा समर्पित करें।

ऊँ गं गणपतये नमः प्रदक्षिणा समर्पयामि।

 

पुष्पांजलि अर्पित करें

ऊँ गं गणपतये नमः पुष्पांजलि समर्पयामि कहते हुए हाथ में लिए पुष्पों को गजानन को समर्पित कर दें।

 

नेवैद्य अर्पित करना

ऊँ गं गणपतये नमः नेवैद्यम् निवेदयामि कहते हुए पंचामृत का भोग लगाएं। भगवान गणेश की पूजन में तुलसी नहीं अर्पित की जाती है। पंचामृत में भी तुलसी का प्रयोग न करें।

 

फल समर्पित करना

ऊँ गं गणपतये नमः फलम् समर्पयामि कहते हुए फल अर्पित करें।

मिठाई का भोग लगाएं

ऊँ गं गणपतये नमः मिष्ठान्न भोजनम् समर्पयामि कहते हुए मीठा भोजन मिठाई अर्पित करें।

पंचमेवा समर्पयामि

ऊँ गं गणपतये नमः पंचमेवा भोजनम् समर्पयामि कहते हुए पंचमेवा अर्पित करें।

 

आचमन करना

ऊँ गं गणपतये नमः नेवैद्यांति जलं आचमनम् समर्पयामि कहते हुए आचमन के लिए जल छोड़े। भगवान को नेवैद्य अर्पित करने के बाद मुख शुद्धि के लिए आचमन करवाया जाता है।

 

ताम्बूल ( पान खिलाना )

ऊँ गं गणपतये नमः तांबूल समर्पयामि कहते हुए पान अर्पित करें। भगवान को पान का भोग लगाएं।

 

द्रव्यदक्षिणा समर्पित करें

ऊँ गं गणपतये नमः यथाशक्ति द्रव्यदक्षिणा समर्पयामि कहते हुए दक्षिणा समर्पित करें।

 

क्षमा-प्रार्थना

क्षमा-प्रार्थना पूजन में रह गई किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए भगवान गणेश से क्षमा मांगे। जीवन में सुख समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करें।

सनातन धर्म अनुसार किसी भी कार्य को करने से पहले भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है । भगवान श्री गणेश की पूजा आह्वान के बिना किसी भी मांगलिक कार्य का शुभारम्भ नहीं होता हैं । इसलिए भगवान गणेश को प्रथम पूज्य भी कहा जाता हैं । भगवान श्री गणेश को बुद्धि के साथ रिद्धि सिद्धि के दाता भी कहे जाते हैं। उनका पूजन वंदन करने वाला कभी भी दुखी नहीं हेाता है। वे धन वैभव से अपने भक्तों को परिपूर्ण कर देते हैं। आइए जानते हैं उनकी पूजा विधि –

भगवान श्री गणेश की सरल पूजा विधि

शास्त्रों में भगवान गणेश के पूजन विधि को 16 भागों में कहा गया है। जिसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, द्रव्य दक्षिणा, आरती, परिक्रमा (प्रदक्षिणा) को 16 उपचार माना गया है। 16 उपचार का अर्थ है- पूजा के 16 तरीके। इन 16 तरीकों से पूजन शुरू करने से पहले सकंल्प लें।

संकल्प

संकल्प करने से पहले हाथों मे जल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें।

संकल्प का उदाहरण

जैसे 27/5/2019 को गणेश पूजन किया जाना है। तो इस प्रकार संकल्प लें।

मैं ( अपना नाम बोलें ) विक्रम संवत् 2077 को, ज्येष्ठ मास के पंचमी तिथि को बुधवार के दिन, पुनर्वसु नक्षत्र में, भारत देश के राजस्थान राज्य के जयपुर शहर में गलता तीर्थ में श्री गणेश का पूजन कर रही / रहा हूं। श्री गणेश मेरी मनोकामना (मनोकामना बोलें) पूरी करें।

आवाहन (गणेश जी को आने का न्यौता देना)

ऊँ गं गणपतये नमः आव्हानयामि स्थापयामि कहते हुए मूर्ति पर चावल चढ़ाएं। आवाहन का अर्थ है कि देव गणेश को अपने घर में आने का बुलावा देना।

 

आसन (गणेश जी को बैठने के लिए स्थान देना)

ऊँ गं गणपतये नमः आसनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि कहते हुए आसन दें। आसन का अर्थ है कि बुलाए गए देव गणेश को घर के पूजा घर में विराजने के लिए आसन दिया है।

 

पाद्यं ( भगवान गणेश के पैर धुलाना)

ऊँ गं गणपतये नमः पादयोः पाद्यं समर्पयामि कहते हुए पैर धुलाएं।

 

अर्घ (हाथ धुलाना)

आचमनी में जल, पुष्प, चावल लें। ऊँ गं गणपतये नमः हस्तयो: अघ्र्यं समर्पयामि कहते हुए हाथों को धुलाएं।

 

आचमन (मुख शुद्धि करना)

ऊँ गं गणपतये नमः आचमनीयम् जलं समर्पयामि कहते हुए आचमन के लिए जल छोड़ें । आचमन का अर्थ होता है मुख शुद्धि करना।

 

पंचामृत से स्नान कराना

ऊँ गं गणपतये नमः पंचामृतस्नानं समर्पयामि कहते हुए पंचामृत से नहलाएं। पंचामृत का अर्थ है कि दूध, दही, शक्कर, शहद व घी का मिश्रण। इन पांचों चीजों से भगवान को नहलाना।

 

शुद्ध जल से स्नान कराना

ऊँ गं गणपतये नमः शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि। कहते हुए शुद्ध जल से स्नान कराएं।

 

वस्त्र अर्पित करना

ऊँ गं गणपतये नमः वस्त्रोपवस्त्रम् समर्पयामि कहते हुए वस्त्र अर्पित करें।

 

गन्ध अर्पित करना

ऊँ गं गणपतये नमः गन्धं समर्पयामि। चंदन, रोली, हल्दी, मेहंदी, अष्टगंध इत्यादि सुगंधित द्रव्यों को लगाएं।

 

पुष्प अर्पित करना

ऊँ गं गणपतये नमः पुष्पं समर्पयामि कहते हुए पुष्प चढ़ाएं।

 

अक्षत (चावल) अर्पित करना

ऊँ गं गणपतये नमः अक्षताम् समर्पयामि। कहते हुए चावल अर्पित करें।

 

धूप दिखाना

ऊँ गं गणपतये नमः धूपम् आघर्पयामि कहते हुए धूप दिखाएं। अपने हाथों से धूप पर से हाथ फिरा कर गणेश जी पर छाया करें।

 

दीप दिखाना

ऊँ गं गणपतये नम दीपम् दर्शयामि। कहते हुए दीपक दिखाएं। अपने हाथों से दीपक पर से हाथ फिरा कर भगवान गणेश पर छाया करें।

 

आरती करें

ऊँ गं गणपतये नमः आरार्तिक्यम् समर्पयामि कहते हुए आरती अर्पित करें।

 

प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करें

हाथ में पुष्प लेकर भगवान गणेश की परिक्रमा करें। परिक्रमा करने के बाद भगवान गणेश की मूर्ति के सामने यह कहते हुए प्रदक्षिणा समर्पित करें।

ऊँ गं गणपतये नमः प्रदक्षिणा समर्पयामि।

 

पुष्पांजलि अर्पित करें

ऊँ गं गणपतये नमः पुष्पांजलि समर्पयामि कहते हुए हाथ में लिए पुष्पों को गजानन को समर्पित कर दें।

 

नेवैद्य अर्पित करना

ऊँ गं गणपतये नमः नेवैद्यम् निवेदयामि कहते हुए पंचामृत का भोग लगाएं। भगवान गणेश की पूजन में तुलसी नहीं अर्पित की जाती है। पंचामृत में भी तुलसी का प्रयोग न करें।

 

फल समर्पित करना

ऊँ गं गणपतये नमः फलम् समर्पयामि कहते हुए फल अर्पित करें।

मिठाई का भोग लगाएं

ऊँ गं गणपतये नमः मिष्ठान्न भोजनम् समर्पयामि कहते हुए मीठा भोजन मिठाई अर्पित करें।

पंचमेवा समर्पयामि

ऊँ गं गणपतये नमः पंचमेवा भोजनम् समर्पयामि कहते हुए पंचमेवा अर्पित करें।

 

आचमन करना

ऊँ गं गणपतये नमः नेवैद्यांति जलं आचमनम् समर्पयामि कहते हुए आचमन के लिए जल छोड़े। भगवान को नेवैद्य अर्पित करने के बाद मुख शुद्धि के लिए आचमन करवाया जाता है।

 

ताम्बूल ( पान खिलाना )

ऊँ गं गणपतये नमः तांबूल समर्पयामि कहते हुए पान अर्पित करें। भगवान को पान का भोग लगाएं।

 

द्रव्यदक्षिणा समर्पित करें

ऊँ गं गणपतये नमः यथाशक्ति द्रव्यदक्षिणा समर्पयामि कहते हुए दक्षिणा समर्पित करें।

 

क्षमा-प्रार्थना

क्षमा-प्रार्थना पूजन में रह गई किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए भगवान गणेश से क्षमा मांगे। जीवन में सुख समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करें।

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